पंडित जसराज
#17aug #28jan पंडित जसराज 🎂 28 जनवरी, 1930 जन्म भूमि पिली मंडोरी, ज़िला हिसार (अब फ़तेहाबाद, हरियाणा) ⚰️17 अगस्त, 2020 मृत्यु स्थान न्यू जर्सी, संयुक्त राज्य अमेरिका अभिभावक पंडित मोतीराम जी पति/पत्नी मधु जसराज संतान पुत्र सारंग देव और पुत्री दुर्गा कर्म भूमि भारत पुरस्कार-उपाधि पद्म विभूषण (2000), पद्म भूषण (1990) और पद्मश्री (1975) प्रसिद्धि शास्त्रीय गायक विशेष योगदान इनके द्वारा अवधारित एक अद्वितीय एवं अनोखी जुगलबन्दी, जो 'मूर्छना' की प्राचीन शैली पर आधारित है। इसमें एक महिला और एक पुरुष गायक अपने-अपने सुर में भिन्न रागों को एक साथ गाते हैं। नागरिकता भारतीय अन्य जानकारी पंडित जसराज ने बाबा श्याम मनोहर गोस्वामी महाराज के सान्निध्य में 'हवेली संगीत' पर व्यापक अनुसंधान कर कई नवीन बंदिशों की रचना भी की थी। हमारे देश में शास्त्रीय संगीत कला सदियों से चली आ रही है। इस कला को न केवल मनोरंजन का, अपितु ईश्वर से जुड़ने का एक महत्त्वपूर्ण स्रोत माना गया है। ऐसे ही एक आवाज़ थे ख्यातिप्राप्त पंडित जसराज जी, जिन्होंने मात्र 3 वर्ष की अल्पायु में कठोर वास्तविकताओं की इस ठंडी दु...