उत्पल दत्त
उत्पल दत्त
अन्य नाम उत्पल दा
🎂जन्म 29 मार्च, 1929
जन्म भूमि बारसाल, पूर्वी बंगाल
⚰️मृत्यु 19 अगस्त, 1993
अभिभावक गिरिजारंजन दत्त
पति/पत्नी शोभा सेन
संत बिष्णुप्रिया (पुत्री)
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी तथा दार्शनिक सिनेमा
मुख्य फिल्में 'गोलमाल', 'सात हिंदुस्तानी', 'रंग बिरंगी', 'अंगूर', 'कर्तव्य', 'ईमान धर्म', 'शुभ दोपहर' आदि।
शिक्षा अंग्रेजी साहित्य में स्नातक
विद्यालय 'सेंट जेवियर कॉलेज', कोलकाता
पुरस्कार-उपाधि 'फ़िल्म फ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार', 'राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार'।
नाटकीय अभिनेता और फिल्म निर्देशक
भारतीय
अन्य जानकारी 1940 में उत्पल दत्त अंग्रेजी थिएटर से जुड़े और अभिनय की शुरुआत कर दी। इस दौरान उन्होंने थिएटर कंपनी के साथ मिलकर भारत और पाकिस्तान में कई नाटकों का मंचन किया। नाटक 'ओथेलो' से उन्हें असली वाहवाही मिली।
उत्पल भारतीय सिनेमा के ऐसे प्रसिद्ध अभिनेता थे, शॉ हिंदी और फ़िल्मों में अपना अमित प्रभाव छोड़ गए। एक अभिनेता के रूप में उत्पल दत्त ने लगभग हर भूमिका निभाई। हिंदी फिल्म 'उत्पल दा' कभी पिता तो कभी चाचा, कहीं डॉक्टर तो कहीं सेठ, कभी बुरे तो बड़े अच्छे बने 'उत्पल दा' को दर्शक किसी भी रूप में पसंद नहीं करते। उत्पल दत्त को ज्यादातर एक हास्य अभिनेता के रूप में याद किया जाता है। वर्ष 1979 की सुपरहिट फिल्म 'गोलमाल' में उनके द्वारा निभाया गया शानदार हास्य अभिनय 'भवानी शंकर' आज भी याद किया जाता है। उत्पल दत्त एक उच्च दर्जे के अभिनेता ही नहीं, एक कुशल निर्देशक और नाटककार भी थे। सीरियल से लेकर कॉमेडी तक के हर रोल में वे बड़ी संजीदगी से रुके हुए थे।
जन्म और शिक्षा
उत्पल दत्त का जन्म 29 मार्च, 1929 को पूर्वी बंगाल (ब्रिटिश भारत) के बारीसाल में एक हिंदू परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम गिरिजारंजन दत्त था, जिन्होंने अपने पुत्र को पढ़ाई के लिए कोलकाता (भूतपूर्व कोलकाता) भेजा था। उत्पल जी ने वर्ष 1945 में 'सेंट जेवियर कॉलेज', कोलकाता से अंग्रेजी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की।
विवाह
साल 1960 में उत्पल दत्त ने थिएटर और फिल्म एक्ट्रेस शोभा सेन से शादी कर ली। डॉक्टर बिष्णुप्रिया अपने एक संत हैं।
फ़िल्मी शुरुआत
1940 में उत्पल दत्त इंग्लिश थिएटर से जुड़े और अभिनय की शुरुआत हुई। शेक्सपियर साहित्य से उत्पल जी का अत्यंत समर्पण था। इस दौरान उन्होंने थिएटर कंपनी के साथ मिलकर भारत और पाकिस्तान में कई नाटकों का मंचन किया। नाटक 'ओथेलो' से उन्हें असली वाहवाही मिली। बाद में उत्पल दत्त का रुझान अंग्रेजी से बैलर नाटक की ओर चला गया। 1950 के बाद उन्होंने एक प्रोडक्शन कंपनी जॉइन कर ली और इसी तरह से अपनी बैलर फिल्में प्रसारित करना शुरू किया। बंगाली फिल्मों के साथ उनके थिएटर से प्रेम भी जारी हो रहा है। इस दौरान उन्होंने कई नाटकों का निर्देशन ही नहीं बल्कि लेखन कार्य भी किया। बैलर पॉलिटिक्स ने अपने नाटकों को लेकर कई बार विवादों को भी जन्म दिया।
हास्य कलाकार
1950 में मशहूर फिल्मकार मधु बोस ने अपनी फिल्म 'माइकल मधुसुधन' में लीड रोल दिया, जिसे फेवरेट पोजिशन मिली। इसके बाद उत्पल दत्त ने सत्यजीत रे की फिल्मों में भी काम किया। हिंदी सिनेमा में उत्पल दत्त एक महान हास्य अभिनेता के रूप में जाने गए थे। हालाँकि उन्होंने बहुत कम फिल्मों में काम किया। 'गुड्डी', 'गोलमाल', 'नरम-गरम', 'रंग बिरंगी' और 'शौकीन'।
उत्पल दत्त हिंदी सिनेमा में बेहद सहयोगी फ़ेबी देर से हुए थे, वैसे ही बंगाली और सिनेमा में उनका ही नाम था। उन्होंने हिंदी फिल्मों की अपनी लंबी सूची में बहुधा कॉमिक की प्रमुख भूमिकाएं निभाईं। मगर अमिताभ बच्चन की पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' में वे भी एक हिंदुस्तानी थे। बल्कि एक तरह से देखा गया तो उत्पल जी ही मुख्य भूमिका में थे और अमिताभ बच्चन सहित अन्य सभी कलाकार सहायक भूमिकाएँ निभा रहे थे। इसी तरह से सत्तार के दशक में भारतीय समतांत्रिक सिनेमा की जिन फिल्मों की फिल्में जारी की गईं, उनमें प्रमुख कृतियों में 'भुवन शोम' भी थीं और उनके नायक उत्पल दत्त भी थे। इस फिल्म में अभिनय के लिए उत्पल जी को वर्ष 1970 में श्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला था। मगर हिन्दी सिनेमा में अधिक प्रतिष्ठा और काम विश्वनाथ मुखर्जी की 'गोलमाल' से मिली, जो न कला फ़िल्में धूमिल थीं और न ही साजिद फ़ार्मुला फ़िल्में।
फ़िल्म 'गोलमाल'
फिल्म 'गोलमाल' में ऋषिदा (ऋषिकेश मुखर्जी) ने उत्पल दत्त की गंभीर छवि के विपरीत 'भवानीशंकर' में एक ऐसे किरदार की भूमिका दी, जिसमें मूछों से भी ज्यादा की भूमिका थी। हीरो अमोल पालेकर से लेकर दीना पाठक तक के सभी एडक्टर्स का कॉमिक किरदार आज भी एक मिसाल है। दूसरे उत्पल दा सीरियस के साथ भी इतने हंसे थे कि उस साल 'बेस्ट कॉमेडियन' का फिल्मफेयर अवॉर्ड उन्हें मिला था। फिल्म 'गोलमाल' में उत्पल जी जिस ब्रांड से 'अच्छाआ....' निकले थे, वो उनका ट्रेड मार्क बन गया था। आज भी मिमिक्री कलाकार उस तकिया कलाम को प्रदर्शित कर रहे हैं, तो दर्शक समझ जाएंगे कि वह उत्पल दत्त की नकल कर रहे हैं। हिन्दी फ़िल्मों में फिर से हलकी-फुल्की भूमिकाएँ लिखीं। तब ये किसने सोचा था कि बंगाली और हिंदी मनोरंजन जगत के इस दिग्गज अभिनेता ने अपने करियर की शर्तें सेट कर ली हैं।
🎥
यह उत्पल दत्त की अधूरी फिल्मोग्राफी है।
माइकल मधुसूदन (1950)
विद्यासागर (1950)
विक्रमादित्य रवीश (1954)
रानी रासमणि (1955)
टका आने पे (1956)
सुभलग्न (1956)
हरानो सुर (1957)
सप्तपदी (1961) (स्वर)
रक्त पलाश (1962)
शेष अंका (1963)
सूर्य शिखा (1963)
मोमर अलो (1964)
शेक्सपियर-वल्लाह (1965)
चौरंगी (1968)
गुरु (1969)
भुवन शोम (1969)
सात हिंदुस्तानी (1969)
बॉम्बे टॉकी (1970)
कलिता नायक (1970)
कॉलेज 71 (1971)
गुड्डी (1971)
खुंजे बेरई (1971)
एक अधूरी कहानी (1972)
मेरे जीवन साथी (1972)
सबसे बड़ा सुख (1972)
हनीमून (1973)
मरजीना अब्दुल्ला (1973)
श्रीमान पृथ्वीराज (1973)
असाती (1974)
कोरस (1974)
मिस्टर रोमियो (1974)
जुक्ती, तकको आर गप्पो (1974)
थागिनी (1974)
अमानुष (1975)
जूली (1975)
अनाड़ी (1975)
पलंका (1975)
जन अरन्या (1976)
उत्पाद (1976)
दो अंजाने (1976)
सनटैन (1976)
सेई चोख (1976)
शेक (1976)
कोतवाल साब (1977)
यही है जिंदगी (1977)
इमाम धरम (1977) बलबीर सिंह, इमाम के रूप में
आनंद आश्रम (1977)
फ़ोर्फ़ (1977)
दुल्हन वही जो पिया मन भाये (1977)
फ़रिश्ता या कातिल (1977)
किस्सा कुर्सी का (1977)
प्रियतमा (1977)
स्वामी (1977)
अतिथि (1978)
स्ट्राइकर (1978)
सफेद हाथी (1978)
धनराज तमांग (1978)
जोई बाबा फलुनाथ (1978)
बचपन खिलोने (1978)
कर्तव्य (1979) प्रेमी धनपति राय के रूप में
गोल माल (1979)
ग्रेट जुआरी (1979)
झोर (1979)
प्रेम विवाह (1979)
एतराज़ (1980)
हीरक राजा देशे (1980)
पाक सॉ (1980)
अपने पराए (1980)
राम बलराम (1980)
अग्नि परीक्षण (1981)
नर गरम (1981)
सोने की एक रात (1981) नीरस रिसर्च (भारत:बंगला शीर्षक)
चल चित्र (1981)
मेघमुक्ति (1981)
सुबर्ना गोलक (1981)
शौकीन (1981)
बैसा मेघखी (1981) कर्नल मैनिंघम के रूप में
राजबधू (1982)
रास्ते में प्यार के (1982)
हमारी बहू अलका (1982)
अंगूर (1982)
अच्छा बुरा (1983)
रंग बिरंगी (1983)
दुती पाटा (1983)
किसी से ना कहना (1983)
पसंद अपनी अपनी (1983)
शुभ कामना (1983)
प्रेम विवाह (1984)
जॉन जनार्दन (1984)
लाखों की बात (1984)
इंकलाब (1984)
पार (1984)
ये देश (1984)
जाबा (1985)
हरिश्चंद्र शाब्या (1985)
मेरा नौकर (1985)
आर पार (1985)
अन्य अभिचार (1985)
आधारभूत प्रत्यक्ष (1985)
आपके साथ (1986)
बन जाये (1986)
किरणदार (1986)
मैं बलवान (1986)
पथभोला (1986)
सदा सुहागन (1986)
किस्सा काठमांडू का (1986-1987, टीवी श्रृंखला)
प्यार के काबिल (1987)
आज का रॉबिन हुड (1987)
आशा ओ भालोबाशा (1988)
महावीर (1988)
ला नुइत बस्तर (1988)
बहुरानी (1989)
जवानी जिंदाबाद (1990)
मेरा पति सिर्फ मेरा है (1990)
अगंतुक (1991)
जान पहचान (1991)
पथ-ओ-प्रसाद (1991)
पद्मा नादिर माझी (1992)
बायोमकेश बक्शी (1993)
मिस्टी (1993) मधुर
अजना पथ (1994)
#29मार्च
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