अभिनेता वरिंद्र

#15aug 
#06dic 
 अभिनेता वीरेंद्र दियोल
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जन्म का नाम
-सुभाष ढडवाल
वीरेंद्र दियोल
🎂15 अगस्त 1948
फगवाड़ा , पंजाब , भारत
मृत
⚰️06 दिसम्बर 1988 (आयु 40 वर्ष)
तलवंडी कलां , पंजाब , भारत
व्यवसाय
अभिनेता , लेखक , निर्माता , निर्देशक
जीवनसाथी
पम्मी वीरेंद्र
बच्चे
2
टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक , वीरेंद्र का असली नाम सुभाष धडवाल था।उनका जन्म फगवाड़ा में हुआ था । 1988 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी  और उनके परिवार में उनकी पत्नी पम्मी और दो बेटे, रणदीप और रमनदीप आर्य हैं।
📽️
दुश्मनी दी आग (1990)...जीता
जट सूरमय (1988) ... जीता
पटोला (1988)... बलवंत 'बल्लू'
जट्ट ते ज़मीन (1987) ... जीता
बतौर निर्देशक मेरा लहू (1987) हिंदी फिल्म
वैरी जट्ट (1985)... वीर
गुड्डो (1985)
निर्देशक के रूप में तुलसी (1985) हिंदी फिल्म
रांझन मेरा यार (1984)
निम्मो (1984) ...कर्म
जिगरी यार (1984) ...कर्म
यार्री जट्ट दी (1984)...जीता
लाजो (1983)...जीता
अज्ज दी हीर (1983)
सिस्कियान (1983)
सरदारा करतारा (1981) ... करतारा
बटवारा (1982) ...कर्म
रानो (1982)...मोहना
सरपंच (1982)...कर्मा
बलबीरो भाभी (1981) .... सुच्चा
खेल मुकद्दर का (1981)
लंबरदारनी (1980)...कर्मा (फिल्म खेल मुकद्दर का शीर्षक के तहत हिंदी में डब की गई)
कुंवारा मामा (1979)
सईदा जोगन (1979)
जिंदरी यार दी (1978)
गिद्दा (1978) डॉक्टर बलवीर
ज़हरीली (1977)
राज के रूप में दो चेहरे (1977) हिंदी फिल्म
सैंटो बंटो (1976)
सवा लाख से एक लड़ाऊं ​​(1976)... गफूर खान
तक्करा (1976)
धरम जीत (1975)
तेरी मेरी इक जिंदरी (1975) ...
इंसान और इंसान (1973) ...
वीरेंद्र सिंह देओल थे तो धर्मेंद्र के कजिन, लेकिन 80 के दशक में वे धरम से भी बड़े स्टार हुआ करते थे। पंजाबी सिनेमा में वीरेंद्र का नाम इतना फेमस हो चुका था कि हर प्रोड्यूसर-डायरेक्टर उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहता था। लेकिन कौन जानता था कि एक दिन फिल्म के सेट पर ही इस एक्टर की गोली मारकर हत्या कर दी जाएगी। उस रोज फिल्म 'जट ते जमीन' की शूटिंग कर रहे थे वीरेंद्र...

 

- बात 6 दिसंबर 1988 की है। उस रोज वीरेंद्र फिल्म 'जट ते जमीन' की शूटिंग कर रहे थे। 
- तभी अचानक किसी ने गोली मारकर उनकी जान ले ली। वीरेंद्र की हत्या किसने की या करवाई? आज तक इस बात पर संशय बना हुआ है। 
- लेकिन कहा जाता है कि वीरेंद्र सिंह की पॉपुलैरिटी ही उनकी दुश्मन बन बैठी थी और कुछ उन्हें आतंकियों ने गोली मारी थी।
- निधन के वक्त वीरेंद्र की उम्र 40 साल थी।

 

1975 में आई थी वीरेंद्र की पहली फिल्म

 

- वीरेंद्र ने अपने करियर की शुरुआत 1975 में आई फिल्म 'तेरी मेरी एक जिंदड़ी' से की थी। इस फिल्म में उनके साथ धर्मेंद्र ने भी अहम भूमिका निभाई थी। 
- फिल्म हिट साबित हुई और वीरेंद्र का करियर चल निकला। इसके बाद उन्होंने 'धरम जीत' (1975), 'कुंवारा मामा' (1979), 'जट शूरमे' (1983), 'रांझा मेरा यार' (1984) और 'वैरी जट' (198) जैसी 25 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 
- एक्टर होने के साथ-साथ वे राइटर, डायरेक्टर और प्रोड्यूसर भी थे।
दरअसल, कुछ लोग आज भी ऐसे हैं, जो ये नहीं जानते कि धर्मेंद्र के एक भाई भी थे। धर्मेंद्र के भाई का नाम वीरेंद्र था, जो पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी कमाल की अदाकारी के लिए पहचाने जाते थे। इतना ही नहीं बल्कि एक्टिंग के साथ-साथ वीरेंद्र फिल्ममेकिंग भी करते थे। वीरेंद्र ने एक-दो नहीं बल्कि कई फिल्मों का निर्माण किया था। वीरेंद्र अपने काम को बहुत सलीके से करते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
कमाल के एक्टर होने के साथ-साथ वीरेंद्र एक शानदार फिल्ममेकर भी थे। रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने करीब 25 फिल्मों का निर्माण किया था। इतना ही नहीं बल्कि वीरेंद्र सिंह देओल की फिल्मों ने धमाल मचाया और सुपरहिट साबित हुई। कम समय में सक्सेस की सीढ़ी चढ़ना वीरेंद्र और उनके परिवार को बहुत महंगा पड़ा और इसकी कीमत उन्होंने जान देकर चुकाई।
आज तक नहीं वीरेंद्र सिंह की मौत का कारण नहीं आया सामने
रिपोर्ट्स की मानें तो कई लोग ऐसे थे, जिन्हें वीरेंद्र सिंह देओल की कामयाबी से परेशानी होने लगी थी और फिल्म ‘जट ते जमीन’ की शूटिंग के दौरान किसी ने उन्हें फिल्म के सेट पर ही गोली मार दी थी। इस घटना ने पूरी फिल्म जगत को हिला दिया था। हालांकि वीरेंद्र सिंह की मौत का कारण कभी सामने नहीं आया, लेकिन इस घटना ने उनके परिवार और फैंस को सदमे में ला दिया था।
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दुश्मनी दी आग (1990)..
जट्ट सूरमे (1988) ... 
पटोला (1988)... 
जट्ट ते ज़मीन (1987) 
मेरा लहू (1987) बतौर निर्देशक हिंदी फ़िल्म
वैरी जट्ट (1985) 
गुड्डो (1985)
तुलसी (1985) बतौर निर्देशक हिंदी फ़िल्म
रांझणा मेरा यार (1984)
निम्मो (1984) 
जिगरी यार (1984) 
यार्री जट्ट दी (1984)
लाजो (1983) ... 
अज्ज दी हीर (1983)
सिस्कियां (1983)
सरदारा करतारा (1981) ... 
बटवारा (1982) ... 
रानो (1982) ... 
सरपंच (1982) 
बलबीरो भाभी (1981) .... 
खेल मुकद्दर का (1981)
लंबरदारनी (1980) (फिल्म खेल मुकद्दर का शीर्षक के तहत हिंदी में डब की गई)
कुंवारा मामा (1979)
सईदा जोगन (1979)
जिन्दरी यार दी (1978)
गिद्दा (1978) 
ज़ेहरीली (1977)
राज के रूप में दो चेहरे (1977) हिंदी फिल्म
संतो बांतो (1976)
सवा लाख से एक लड़ाऊं ​​(1976)
तकरा (1976)
धरम जीत (1975)
तेरी मेरी इक जिंदरी (1975) 
इंसान और इंसान (1973)

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