किशोर कुमार

#04aug
#13oct
किशोर कुमार
 🎂04 अगस्त, 1929 
खण्डवा मध्यप्रदेश 
⚰️13 अक्टूबर, 1987
पत्नी: लीना चन्दावरकर (विवा. 1980–1987), ज़्यादा
बच्चे: अमित कुमार, सुमित कुमार
भाई: अशोक कुमार, अनूप कुमार, सती रानी देवी
भारतीय सिनेमा के मशहूर पार्श्वगायक समुदाय में से एक रहे हैं। वे एक अच्छे अभिनेता के रूप में भी जाने जाते हैं। हिन्दी फ़िल्म उद्योग में उन्होंने बंगाली, हिन्दी, मराठी, असमी, गुजराती, कन्नड़, भोजपुरी, मलयालम, उड़िया और उर्दू सहित कई भारतीय भाषाओं में गाया था। उन्होंने सर्वश्रेष्ठ पार्श्वगायक के लिए 8 फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीते और उस श्रेणी में सबसे ज्यादा फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। उसी साल उन्हें मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लता मंगेशकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उस वर्ष के बाद से मध्यप्रदेश सरकार ने "किशोर कुमार पुरस्कार"(एक नया पुरस्कार) हिंदी सिनेमा में योगदान के लिए चालु कर दिया था।
श्री किशोर कुमार का जन्म 04 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खण्डवा शहर में वहाँ के जाने माने वकील श्री कुंजीलाल जी के यहाँ हुआ था।किशोर कुमार का मूल नाम आभास कुमार गांगुली था। किशोर कुमार चार भाई बहनों में चौथे नम्बर पर थे। उन्होंने अपने जीवन के हर क्षण में खण्डवा को याद किया, वे जब भी किसी सार्वजनिक मंच पर या किसी समारोह में अपना कर्यक्रम प्रस्तुत करते थे, गर्व से कहते थे किशोर कुमार खण्डवे वाले, अपनी जन्म भूमि और मातृभूमि के प्रति ऐसी श्रद्धा बहुत कम लोगों में दिखाई देता है।

शिक्षा

किशोर कुमार इन्दौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़े थे और उनकी आदत थी कॉलेज की कैंटीन से उधार लेकर खुद भी खाना और दोस्तों को भी खिलाना। वह ऐसा समय था जब 10-20 पैसे की उधारी भी बहुत मायने रखती थी। किशोर कुमार पर जब कैंटीन वाले के पाँच रुपया बारह आना उधार हो गए और कैंटीन का मालिक जब उनको अपने पाँच रुपया बारह आना चुकाने को कहता तो वे कैंटीन में बैठकर ही टेबल पर गिलास और चम्मच बजा बजाकर पाँच रुपया बारह आना गा-गाकर कई धुन निकालते थे और कैंटीन वाले की बात अनसुनी कर देते थे। बाद में उन्होंने अपने एक गीत में इस पाँच रुपया बारह आना का बहुत ही भली-भांति प्रयोग किया। बहुत कम लोगों को पाँच रुपया बारह आना वाले गीत की यह मूल कहानी ज्ञात होगी।
किशोर कुमार ने चार विवाह किये थे। विवाह की पहली पत्नी बंगाली गायक और अभिनेत्री रुमा गुहा ठाकुरता उर्फ ​​रुमा घोष थीं। यह विवाह सम्बन्ध 1950 से 1958 तक चला । किशोर दा ने दूसरा विवाह अभिनेत्री मधुबाला से किया था, जिन्होंने उनके घरेलू फिल्म चल्ती का नाम गाड़ी (1958) और झूमूओ (1 9 61) सहित कई फिल्मों में उनके साथ काम किया था। जब किशोर कुमार ने उनके सामने प्रस्ताव रखा, मधुबाला बीमार थीं और इलाज के लिए लन्दन जाने की योजना बना रही थीं। उन्हें वेंट्रिकुलर सेप्टल डिसीस (दिल में छेद) था, और किशोर कुमार अभी भी रुमा से विवाह बन्धन में थे। तलाक के बाद, इस जोड़े ने 1960 में सिविल विवाह किया और किशोर कुमार इस्लाम में परिवर्तित हो गए और कथित तौर पर अपना नाम बदल कर करीम अब्दुल कर दिया। उनके माता-पिता ने विवाह समारोह में भाग लेने से मना कर दिया। माता-पिता को खुश करने के लिए जोड़े ने हिंदू विवाह पद्धति से भी विवाह किया, लेकिन मधुबाला को कभी भी उन्होंने अपनी बहू के रूप में स्वीकार नहीं किया। विवाह के एक महीने के भीतर, मधुबाला अपने पति किशोर कुमार के घर में तनाव की वजह से बांद्रा में अपने बंगले में वापस चली गईं किन्तु वे विवाह में बने रहे, लेकिन मधुबाला के जीवन का बाकी हिस्सा तनाव से भरा रहा। यह सम्बन्ध 23 फरवरी 1969 को मधुबाला की मृत्यु के साथ समाप्त हुआ था।

किशोर दा का तीसरा विवाह योगिता बाली सेे किया जो 1976 से 4 अगस्त 1978 तक चला। किशोर कुमार का चौथा ओर अंतिम विवाह 1980 मे लीना चन्दावरकर से हुआ था। किशोर कुमार के दो बेटे थे, अमित कुमार रुमा के साथ, और सुमित कुमार लीना चन्दावरकर के साथ थे।
🎥
1988 कौन जीता कौन हारा 
1982 चलती का नाम ज़िन्दगी 
1974 बढ़ती का नाम दाढ़ी 
1971 दूर का राही 
1971 हंगामा 
1968 साधू और शैतान 
1968 पड़ोसन गुरु 
1968 हाय मेरा दिल 
1966 प्यार किये जा 
1966 लड़का लड़की
1964 दूर गगन की छाँव में 
1964 मिस्टर एक्स इन बॉम्बे 
1962 हाफ टिकट 
1962 मनमौजी
1962 नॉटी बॉय
1961 झुमरू 
1960 गर्ल फ्रैंड
1960 महलों के ख़्वाब 
1960 काला बाज़ार 
1959 चाचा ज़िन्दाबाद 
1958 चलती का नाम गाड़ी 
1958 रागिनी
1957 आशा 
1957 मिस मैरी 
1957 बंदी 
1956 भाई भाई 
1956 पैसा ही पैसा 
1956 ढाके की मलमल 
1956 मेम साहिब 
1955 भगवत महिमा 
1955 पहली झलक 
1955 बाप रे बाप 
1954 नौकरी 
1954 धोबी डॉक्टर 
1953 लड़्की 
1952 तमाशा 
1946 शिकारी

बतौर निर्देशक

1982 चलती का नाम ज़िन्दगी 
1974 बढ़ती का नाम दाढ़ी 
1971 दूर का राही 
1964 दूर गगन की छाँव में

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