शशि कला

#03aug
#04april 
शकीला नाम शशिकला
🎂03 अगस्त, 1933
जन्म भूमि शोलापुर, महाराष्ट्र
⚰️04 अप्रॅल, 2021
मृत्यु स्थान मुम्बई, महाराष्ट्र
पति/पत्नी ओम सहगल
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र हिन्दी सिनेमा
मुख्य फ़िल्में 'नौ दो ग्यारह', 'जंगली', 'हरियाली और रास्ता', 'ये रास्ते हैं प्यार के', 'गुमराह', 'हिमालय की गोद में', 'फूल और पत्थर', 'घर घर की कहानी', 'दुल्हन वही जो पिया मन भाये', 'सरगम', 'क्रांति', 'घर घर की कहानी', 'कभी खुशी कभी ग़म' आदि।
पुरस्कार-उपाधि 'पद्मश्री' (2007), फ़िल्मफ़ेयर पुरस्कार (दो बार), 'बंगाल जर्नलिस्ट अवार्ड'
प्रसिद्धि अभिनेत्री
नागरिकता भारतीय
अन्य जानकारी सन 1960 के दशक में शशिकला ने 'हरियाली और रास्ता', 'गुमराह', 'हमराही', 'फूल और पत्थर', 'दादी मां', 'हिमालय की गोद में', 'छोटी सी मुलाक़ात', 'नीलकमल', 'पैसा या प्यार' जैसी कई फ़िल्मों में बेहतरीन निगेटिव भूमिकाएं की थीं।
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हिंदी सिनेमा की ग्लैमरस खलनायिकाओं का ज़िक़्र होते ही ज़हन में उभरने वाला पहला नाम शशिकला का था। सन 1960 के दशक के हिंदी सिनेमा में अपनी एक ख़ास जगह बनाने वाली ख़ूबसूरत, चुलबुली और खलनायिका शशिकला को उस दौर के दर्शक आज भी भूले नहीं हैं। शशिकला न सिर्फ़ एक उम्दा अभिनेत्री थीं, बल्कि मौक़ा मिलने पर उन्होंने ख़ुद को एक बेहतरीन डांसर के तौर पर भी साबित किया था। बॉलीवुड में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाली शशिकला का पूरा नाम 'शशिकला जावलकर' था। फिल्मों के साथ-साथ शशिकला ने टीवी में भी काम किया। वह मशहूर सीरियल 'सोन परी' में फ्रूटी की दादी के रोल में नजर आई थीं। साल 2007 में उन्हें भारत सरकार ने 'पद्मश्री' से नवाजा था।
शशिकला का फ़िल्मी कॅरियर
फ़िल्म 'ज़ीनत' साल 1945 में प्रदर्शित हुई थी। सैयद शौक़त हुसैन रिज़वी की अगली फ़िल्म 'जुगनू' (1947) में शशिकला हीरो दिलीप कुमार की बहन की भूमिका में नज़र आयीं। शशिकला के मुताबिक़़ फ़िल्म 'जुगनू' में उनके काम से सैयद शौक़त हुसैन रिज़वी इतने ख़ुश हुए कि उन्होंने अपनी अगली फ़िल्म में शशिकला को हिरोईन बनाने का फ़ैसला कर लिया। लेकिन तभी मुल्क़ का बंटवारा हुआ और शौक़त और नूरजहां पाकिस्तान चले गए। नतीजतन शशिकला के लिए संघर्ष का दौर फिर से लौट आया। 'ऑल इंडिया पिक्चर्स' की 'डोली' (1947) और 'पगड़ी' (1948) और अमेय चक्रवर्ती की 'गर्ल्स स्कूल' (1949) जैसी की कुछ फ़िल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं करने के बाद शशिकला 'रणजीत मूवीटोन' की फ़िल्म 'नज़ारे' (1949) में पहली बार हिरोईन बनीं। इस फ़िल्म में उनके हीरो आगा थे।

दो बेटियों की मां शशिकला के अनुसार, "पति से काफ़ी पहले उनका अलगाव हो चुका था। आम लोगों के बर्ताव में 'बुरी औरत' की अपनी इमेज की वजह से झलकता असर भी उन्हें बेहद खलने लगा था। उधर इंडस्ट्री के बदले हुए माहौल में ख़ुद को ढाल पाना उनके लिए मुश्किल हो चला था। मानसिक दबाव और निराशाएं इतनी बढ़ गयी थीं कि वो विपश्यना के लिए इगतपुरी आश्रम जाने लगीं। उनका झुकाव आध्यात्म की ओर होने लगा।" शशिकला का कहना है, "साल 1988 में बनी फ़िल्म 'घर घर की कहानी' के दौरान घटी कुछ घटनाओं ने मुझे ऐसी चोट पहुंचाई कि मैंने फ़िल्मों से अलग हो जाना ही बेहतर समझा। मैंने मुंबई छोड़ दिया और शांति की तलाश में जगह जगह भटकने लगी। चारधाम यात्रा की, ऋषिकेश के आश्रमों में गयी। लेकिन सिर्फ़ द्वारकापुरी और गणेशपुरी के रमन महर्षि के आश्रम में जाकर मुझे थोड़ी-बहुत शांति मिली वरना बाक़ी सभी जगहों पर धर्म को एक धंधे के रूप में ही पाया।"

शशिकला की छोटी बेटी शैलजा उन दिनों कोलकाता में रहती थीं। एक रोज़ बेटी के एक पारिवारिक मित्र के ज़रिए शशिकला मदर टेरेसा के आश्रम तक जा पहुंचीं। शशिकला का कहना था, "एक तो अभिनेत्री, ऊपर से 'बुरी औरत' की इमेज। पहले तो सभी ने मुझे शक़ की नजर से देखा। कई-कई इंटरव्यू हुए। शिशु भवन और फिर पुणे के आश्रम में मानसिक रोगियों, बीमार बुज़ुर्गों, स्पास्टिक बच्चों और कुष्ठ रोगियों की सेवा में रखकर कुछ दिन मेरा इम्तहान लिया गया। मरीज़ों की गंदगी साफ़ करना, उन्हें नहलाना, उनकी मरहम-पट्टी करना, इस काम में मुझे इतनी शांति मिली कि मैं भूल ही गयी कि मैं कौन हूं। मैं इम्तहान में पास हो गई। और फिर तीन महिने बाद कोलकाता में मदर से जब पहली बार मुलाक़ात हुई तो उनसे लिपटकर देर तक रोती रही। मदर के स्पर्श ने मुझे एक नयी ऊर्जा दी। अब फिर से वो ही दिनचर्या शुरू हुई। शिशु भवन, मुंबई और गोवा के आश्रम, सूरत और आसनसोल के कुष्ठाश्रम, निर्मल हृदय-कालीघाट में मरणासन्न रोगियों की सेवा, लाशें तक उठाईं। उस दौरान मदर के कई चमत्कार देखे। मैं वहां पूरी तरह से रम चुकी थी

साल 1993 में शशिकला घर वापस लौटीं तो पता चला उनकी बड़ी बेटी को कैंसर है। बेटी के बच्चे छोटे थे। दो साल बाद बेटी गुज़र गयी। शशिकला के अनुसार- "मदर ने हालात से लड़ने की ताक़त दी। सीरियल 'जुनून' और 'आह' के ज़रिए मैंने फिर से अभिनय की शुरुआत की। 'सोनपरी' और 'किसे अपना कहें' जैसे सीरियलों के अलावा फ़िल्मों में भी मैं काफ़ी व्यस्त हो गयी।" शशिकला के मुताबिक़़ पति के साथ भी उनके सम्बंध एक बार फिर से काफ़ी हद तक सामान्य हो चले थे, जो नैनीताल में बस चुके थे।
88 साल की आयु में शशिकला का निधन 4 अप्रॅल, 2021 को मुंबई, महाराष्ट्र के कोलाबा में दोपहर 12 बजे हुआ।

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2005 पद्मश्री लालू प्रसाद यादव 
2004 मुझसे शादी करोगी 
2004 रक्त 
2003 चोरी चोरी 
2001 कभी खुशी कभी ग़म 
1999 बादशाह 
1999 मदर 
1998 परदेसी बाबू 
1998 मैं सोलह बरस की
1998 धूँढते रह जाओगे 
1998 महाराजा 
1997 सलमा पे दिल गया है
1998 महाराजा 
1997 सलमा पे दिल गया है 
1997 लहू के दो रंग 
1988 मैं तेरे लिये 
1988 घर घर की कहानी 
1987 मेरा कर्म मेरा धर्म 
1987 दादागिरी 
1985 तवायफ़ 
1985 अर्जुन 
1984 राम तेरा देश 
1983 सौतन 
1982 तेरी माँग सितारों से भर दूँ 
1982 सम्राट 
1982 अनोखा बंधन 
1981 बीवी ओ बीवी
1981 रॉकी 
1981 ज्योति 
1981 क्रांति 
1981 आहिस्ता आहिस्ता
1980 खूबसूरत 
1980 यह कैसा इंसाफ़ 
1980 साजन मेरे मैं साजन की 
1980 स्वयंवर 
1979 सरगम 
1978 हमारा संसार
1977 अमानत 
1977 स्वामी 
1977 दिलदार 
1977 दुल्हन वही जो पिया मन भाये
1971 छोटी बहू 
1971 जवान मोहब्बत 
1970 हमजोली 
1970 घर घर की कहानी
1967 छोटी सी मुलाकात 
1967 मेहरबाँ 
1966 अनुपमा 
1966 फूल और पत्थर 
1966 प्यार मोहब्बत 
1966 नींद हमारी ख़्वाब तुम्हारे 
1966 पति पत्नी 
1966 दो दिलों की दास्तान 
1966 दादी माँ
1965 हिमालय की गोद में 
1965 बेदाग 
1964 जहाँ आरा 
1964 अपने हुए पराये 
1964 आप की परछाइयाँ 
1964 दूर गगन की छाँव में 
1964 मेरा कसूर क्या है 
1963 गुमराह
1963 ये रास्ते हैं प्यार के
1962 आरती 
1961 जंगली 
1960 कानून 
1959 सुजाता 
1957 नौ दो ग्यारह
1956 दिवाली की रात 
1954 समाज 
1953 जीवन ज्योति 
1953 तीन बत्ती चार रास्ता

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